सत्यमेव जयते

                                     सत्यमेव जयते
किताबों से लेकर सड़क किनारे दीवारों और पुलिस थानों से लेकर मंत्रियों के आलीशान दफ्तरों एक वाक्य बड़े सुंदर अक्षरों में लिखा पाता हूँ 'सत्यमेव जयते' अर्थात सत्य ही जीतता है। पर कौनसा सत्य? वह जो किताबी ज्ञान वाला है या एफआईआर में दर्ज है या वह जो सालों से कोर्ट - कचहरी की फाइलों में दफ़न है और  जिसका ज़ायका रोज़ दीमक उठ रही हैं। आज सत्य का अलग स्वरूप , अलग परिभाषा और एक अलग मानदंड है। बचपन मे सुना था ' सौ बार झूठ बोलने से झूठ सत्य नहीं बन जाता ' लेकिन आज सत्य वैसे ही बन जाता है जैसे मशीन की एक तरफ से कोई वाक्य डालो और दूसरी तरफ से आदर्श,सत्यनिष्ठ वाक्यों और वचनों के सर्टिफिकेट की पोटली अपने साथ ले लो। अब तो जो कहा जायेगा वही सत्य और आदर्श होगा समाज का, पूरा प्रशासन उसी से संचालित होगा।
     किताबों में खूब पढ़ा था सत्य बोलो, सदाचारी बनो लोग आपकी इज़्ज़त करेंगे। पर सवाल वहीं आकर अटक जाता है कौनसा वाला सत्य?
बच्चियों से बलात्कार हो रहा है यह भी सत्य है और बलात्कार का आरोपी 'बाइज़्ज़त' बरी हो रहा है यह भी सत्य है। या फिर जब उसकी तारीख आती है तो पीड़िता को मरे पाँच साल से ऊपर हो चुके होते हैं , यह भी सत्य है।
सेना के जवान सीमा पर मर रहे हैं यह भी सत्य है और सरकार बदला या ज़्यादा से ज़्यादा मुआवजा देने की बात करती है यह भी सत्य है। महंगाई बढ़ रही है, किसान आत्महत्या कर रहा है यह भी सत्य है और सरकारी वादों और कथनों का विकास हो रहा है यह भी सत्य है। लब्बोलुआब यह है कि चारों तरफ सत्य ही सत्य है हालांकि यह विशेष रंग के चश्मे से ही दिखेगा। लेकिन सवाल यह है कि वह चश्मा होगा किसका ? इसका जवाब है  वह चश्मा है शिक्षा का, विश्वास का , आपसी भाईचारे का, अहिंसा का।
आज कुछ सत्य ऐसे भी हैं जिन्हें हमें मिटाना है जैसे - बलात्कार, महंगाई, अशिक्षा और धर्म-जाति के नाम पर आपस में अलगाव।
      किसी महापुरुष ने कहा था  - 'अगर आपको परिवर्तन लाना है तो निम्न वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक को साथ लेकर हाथ से हाथ मिला कर आना होगा।' इसके लिए लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ  पुनः जनता की आवाज़ बन , जनता के साथ मिलकर एक नए सत्य की रूपरेखा तैयार करे जिसे हम गौरव के साथ आत्मसात कर सकें और कह सकें - सत्यमेव जयते।

- तालिब हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली

Comments

  1. आपने जिस सत्य की बात की उसकी भी जय हो तालिब जी।

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    1. धन्यवाद आशीर्वाद बनाये रखें।

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